प्रकृति में लोगों का स्थान

प्रकृति में लोग

मनुष्य मात्र प्राणी हैं जो प्रकृति का हिस्सा हैं, और उनकी गतिविधियों का प्राकृतिक पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। साथ ही, प्राकृतिक पर्यावरण की गुणवत्ता बदले में लोगों के स्वास्थ्य और हितों को प्रभावित करती है।

प्रत्येक प्राणी के प्राकृतिक वातावरण में जीवन के अन्य रूप और निर्जीव संसाधन (मिट्टी, पानी, हवा, आदि) दोनों शामिल हैं। पृथ्वी, जल, वायुमंडल, सूक्ष्मजीवों, कवक, पौधों और जानवरों के बीच संबंध समय की विशाल अवधी में विकसित हुए हैं। इनमें से अधिकतर सम्बन्ध बहुत जटिल, पेचीदा और अपर्याप्त रूप से समझे गए हैं। पर्यावरण प्राणियों पर प्रभाव डालता है और वे बदले में पर्यावरण पर प्रभाव डालते हैं।

प्रत्येक पारिस्थिति प्रणाली असंख्य प्राणियों से बनी होती है जो एक दूसरे पर और जिस वातावरण में वे रहते हैं उस पर परस्पर प्रभाव डालते हैं। जैवमंडल पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवित चीजों से, साथ ही उस वातावरण से जिसमें वे हैं, यानी सभी पारिस्थिति प्रणालियों से बना है।

इसलिए, हमें जीवित प्राणियों और प्राकृतिक पर्यावरण के अन्य घटकों, दोनों को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि वे एक-दूसरे पर निर्भर हैं। अन्य प्राणियों के विपरीत, मनुष्य अपनी गतिविधियों के अपशिष्ट और प्रदूषण जैसे नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूक हो सकता है। यह कई प्रकार (रासायनिक, गंध, ध्वनि, दृश्य) का होता है और पृथ्वी, जल तथा वायु को प्रभावित करता है। प्रत्येक व्यक्ति प्राकृतिक पर्यावरण और अन्य प्राणियों पर अपने क्रियाओं के हानिकारक प्रभाव को कम करने का प्रयास कर सकता है।

किसी मानव समुदाय या समाज की स्थिरता तब सुनिश्चित होती है जब उस समुदाय या समाज में लोगों की जीवन शैली निकट भविष्य के लिए प्राकृतिक वातावरण द्वारा टिकी रह सके। (वर्तमान में, कई प्राकृतिक संसाधनों का पर्यावरण की उन्हें पुनर्जीवित करने की क्षमता से परे दोहन किया जाता है। इसके अलावा प्रदूषण के कारण प्राकृतिक पर्यावरण की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।)